छत्तीसगढ़ के ग्राम पंचायतों के सोशल ऑडिट में गड़बड़ी का खुलासा
बिलासपुर|छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायतों का सोशल ऑडिट हुआ है.अलग अलग आंकड़े सामने आए हैं, लेकिन इसी ऑडिट में सरकारी खजाने की बंदरबांट और भारी वित्तीय गड़बड़ी का मामला भी है.करोड़ों के फर्जी भुगतान के साथ सरकारी गाइडलाइन्स और निर्धारित प्रक्रियाओं को दरकिनार करने के आरोप हैं. जिसको लेकर बीजेपी गड़बड़ियों पर सख्ती से कार्रवाई करने की बात कर रही है तो वहीं कांग्रेस आर्थिक आधार बिगड़ा तो फिर सोशल ऑडिट क्यों.पहले ये रिपोर्ट देखिए फिर चर्चा की शुरुआत करते हैं|
छत्तीसगढ़ के ग्राम पंचायतों का सोशल ऑडिट
छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार खेल उजागर हुआ है. सोशल ऑडिट की ताजा रिपोर्ट ने ग्राम सरकारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रदेश भर में नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपयों की बंदरबांट की गई है.वित्तीय अनुशासन को धता बताते हुए न केवल प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया. बल्कि सीधे तौर पर गबन और हेराफेरी के हजारों मामले सामने आए हैं.बिलासपुर और कोरबा जैसे जिले इस धांधली के गढ़ बनकर उभरे हैं.जहाँ रिकॉर्ड संधारण में लापरवाही और टेंडर नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं|
सरकारी खजानों में कैसे हुई गड़बड़ी?
- छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों में विकास के नाम बंदरबांट और भारी वित्तीय गड़बड़ी
- सोशल ऑडिट रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक 151.07 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान
- सरकारी गाइडलाइन्स और निर्धारित प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का लगा आरोप
- कुल 11,717 पंचायतों में से 11,302 का ऑडिट, कई शिकायतों का हुआ खुलासा
- जांच में 19.66 करोड़ के सीधे वित्तीय गबन के 6,331 मामले भी उजागर हुए हैं
- रिकॉर्ड संधारण और टेंडर नियमों के उल्लंघन के 13,861 मामले दर्ज किए गए हैं
- बिलासपुर में सबसे ज्यादा गड़बड़ी में आगे, कोरबा में गबन की शिकायतें ज्यादा
जो भी गड़बड़ी हो कार्रवाई कठोर होगी – विजय शर्मा
छत्तीसगढ़ में सोशल ऑडिट के आंकड़ों पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा का कहना है कि इस बार ऑडिट का काम सख्ती से कर रहे है..जो भी गड़बड़ी हो कार्रवाई कठोर होगी. इधर कांग्रेस ने मामले को निशाना साध रही है.कांग्रेस का कहना है कि गड़बड़ियों को लेकर कार्रवाई होना जरुरी है, लेकिन यहां तो आर्थिक आधार ही बिगड़ा हुआ है तो क्या मतलब का सोशल ऑडिट हो रहा है|
छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों में सोशल ऑडिट के जरिए सामने आई करोड़ों की धांधली जांच बेहद जरुरी है. विकास के नाम पर जिस तरह से नियमों को ताक पर रखकर बंदरबांट की गई. उससे साफ है कि पंचायत स्तर पर निगरानी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त मानी जा रही है. अब जबकि यह मामला राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो चुका है, तो सत्ता पक्ष सख्ती की बात कर रहा है और विपक्ष व्यवस्था की बुनियाद पर सवाल उठा रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल जनता के उस भरोसे का है जिसे इन घोटालों ने तोड़ा है|


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