सिर्फ बुखार को न मानें स्वाइन फ्लू की पहचान, ये लक्षण भी दे सकते हैं H1N1 का इशारा
एच1एन1 (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू के मामले केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित न रहकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित देश के कई अन्य राज्यों में भी तेजी से पांव पसार रहे हैं। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त के अंत तक अकेले दिल्ली में संक्रमितों का आंकड़ा 3,200 के पार पहुंच गया, जिसने पिछले सात वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वहीं उत्तर प्रदेश में भी प्रयोगशाला जांच के माध्यम से 685 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है।
क्रॉनिक मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अधिक खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आम लोगों को स्वाइन फ्लू से अत्यधिक भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि अधिकांश मामलों में लक्षण सामान्य स्तर के ही पाए जा रहे हैं। हालांकि, पूर्व से किसी क्रॉनिक बीमारी (जैसे डायबिटीज) से पीड़ित व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों में इसके गंभीर रूप लेने का जोखिम अधिक रहता है।
बिना बुखार के भी संभव है एच1एन1 का संक्रमण
आमतौर पर स्वाइन फ्लू का मुख्य लक्षण तेज बुखार माना जाता है, परंतु चिकित्सीय शोध एवं अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) की रिपोर्ट के अनुसार हर मरीज में बुखार आना अनिवार्य नहीं है:
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अदृश्य लक्षण: बिना बुखार के भी मरीजों को खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द और अत्यधिक शारीरिक थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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विशिष्ट स्थिति: बुजुर्गों में कई बार बिना बुखार के केवल भूख कम लगना और अत्यधिक सुस्ती भी फ्लू के संकेत हो सकते हैं। बच्चों में उल्टी और दस्त के लक्षण प्रमुखता से देखे जा रहे हैं।
जांच और बचाव के लिए चिकित्सीय परामर्श अनिवार्य
केवल लक्षणों के आधार पर स्वाइन फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम के बीच अंतर करना कठिन होता है। इसके सटीक परीक्षण हेतु डॉक्टर आवश्यकतानुसार 'रैपिड फ्लू टेस्ट' या अधिक संवेदनशील 'मॉलिक्यूलर टेस्ट' (जो वायरल आरएनए की पहचान करता है) कराने की सलाह देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित व्यक्ति बीमारी के शुरुआती तीन दिनों में बिना किसी स्पष्ट लक्षण या बुखार के भी अन्य लोगों में संक्रमण फैला सकता है। अतः सांस लेने में तकलीफ या फ्लू के लक्षण तीव्र होने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श और एंटीवायरल उपचार लेना चाहिए।


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