चांदी की कीमतों में गिरावट, आपके शहर में क्या है आज का भाव?
नई दिल्ली। घरेलू सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन मंदी का रुख देखने को मिला है। स्थानीय आभूषण विक्रेताओं की कमजोर मांग और वैश्विक बाजारों में बड़े निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली के चलते चांदी की कीमतों पर तगड़ा दबाव देखा जा रहा है। हाजिर बाजार में आई इस भारी गिरावट के बाद अब प्रमुख महानगरों दिल्ली और मुंबई सहित देश के अधिकांश हिस्सों में चांदी के दाम एक खास दायरे में सिमट कर स्थिर बने हुए हैं।
घरेलू सर्राफा बाजारों में चांदी की वर्तमान स्थिति
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देश के प्रमुख सर्राफा बाजारों में चांदी की खुदरा कीमतें गिरावट के बाद स्थिर बनी हुई हैं।
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दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और पटना जैसे बड़े शहरों में प्रति किलोग्राम चांदी का भाव 2,35,000 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
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दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्र चेन्नई में चांदी की कीमत थोड़ी उच्च स्तर पर बनी हुई है, जहां यह 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रही है।
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उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे लखनऊ, कानपुर, मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद में भी भाव 2,35,000 रुपये प्रति किलो पर दर्ज किए गए।
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अन्य बड़े कारोबारी केंद्रों जैसे जयपुर, इंदौर, चंडीगढ़, गुरुग्राम और लुधियाना में भी ग्राहकों को इसी स्थिर भाव पर चांदी मिल रही है।
वैश्विक और वायदा बाजार में दिखा बिल्कुल विपरीत रुख
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स्थानीय हाजिर बाजार की सुस्ती के उलट अंतरराष्ट्रीय और वायदा बाजारों में कीमती धातुओं में जोरदार उछाल दर्ज किया गया।
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विदेशी बाजार कोमेक्स पर सोना 1.86 प्रतिशत की बड़ी तेजी के साथ 4,080 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी भी 2.39 फीसदी की छलांग लगाकर 59 डॉलर प्रति औंस के बेहद करीब कारोबार करती दिखी।
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अमेरिकी बाजारों में मुद्रास्फीति (महंगाई) के आंकड़े उम्मीद से कम आने के कारण निवेशकों में यह धारणा बनी है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर रोक लगा सकता है, जिससे विदेशी बाजारों को बल मिला।
मांग में कमी और आगामी दिनों के लिए बाजार का अनुमान
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई इस मजबूती के बावजूद भारत के घरेलू बाजार में आभूषण निर्माताओं और औद्योगिक इकाइयों की मांग काफी ठंडी पड़ी हुई है।
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बाजार विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक खरीदारों की बेरुखी और शादियों के सीजन से ठीक पहले की सुस्ती के चलते स्थानीय कीमतों में सुधार नहीं हो पा रहा है।
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आने वाले समय में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति क्या रुख अपनाती है और देश में त्योहारी मांग कब तक जोर पकड़ती है।


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