कौन हैं सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री? जानें क्यों दिया इस्तीफा
लखनऊ|यूपी के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के ब्राह्मण बटुकों से हुए अपमान और यूजीसी के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया है। अलंकार का पूरा जीवन संघर्षों से भरा रहा है। साढ़े दस साल की उम्र में ही पिता का निधन हो गया। दिल में सिविल सेवा की तैयारी करने की चाहत होते हुए भी पहले छोटे भाई, बहनों को काबिल बनाने के लिए प्राइवेट नौकरी की। भाई बहनों के सेटल होने नौकरी छोड़कर पीसीएस की तैयारी की और पहली बार में ही सफलता हासिल की।अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। उनके जीवन का संघर्ष बेहद कम उम्र में ही शुरू हो गया था। जब वे मात्र साढ़े दस वर्ष के थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया। घर के सबसे बड़े बेटे होने के नाते उन पर जिम्मेदारियों का बड़ा बोझ था। लेकिन उनकी माता श्रीमती गीता अग्निहोत्री ने कठिन परिस्थितियों में भी उनकी परवरिश और शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी।
शंकराचार्य अपमान व UGC नियमों के खिलाफ UP में PCS अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा
आईआईटी बीएचयू से पढ़ाई और प्राइवेट नौकरी
कानपुर में ही अलंकार ने 12वीं तक की पढ़ाई की। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में उन्होंने पूरे प्रदेश में 21वां स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित आईटी-बीएचयू (अब आईआईटी-बीएचयू) से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद सिविल सेवा में जाना चाहते थे। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए आईटी कंपनी में कंसल्टेंट की नौकरी ज्वाइन की।
सपनों के लिए बड़ा बलिदान
आईटी में एक अच्छी और सुरक्षित नौकरी होने के बावजूद, अलंकार के मन में सिविल सेवा में जाने का सपना हमेशा जिंदा रहा। साल 2015 में जब उनके पारिवारिक और आर्थिक दायित्व (भाई-बहनों की शादी और सेटलमेंट) पूरे हो गए, तब उन्होंने 10 साल पुरानी जमी-जमाई नौकरी छोड़ने का साहसिक फैसला लिया।
अलंकार अग्निहोत्री ने सिटी मजिस्ट्रेट बोर्ड पर लिखा ‘रिजाइन’, बयां किया गुस्सा
सफलता के पीछे का ‘सपोर्ट सिस्टम’
अलंकार अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी आस्था मिश्रा और अपनी माता को देते हैं। उन्होंने बताया था कि एक विवाहित व्यक्ति के लिए नौकरी छोड़कर तैयारी करना जोखिम भरा था, इसलिए उन्होंने एक साल की सैलरी बचाकर फंड इकट्ठा किया ताकि अगले 2-3 साल तक परिवार को आर्थिक दिक्कत न हो।भाजपा बनी विदेशी जनता पार्टी, इस्तीफे के बाद एमपी-एमएलए पर भी भड़के PCS अलंकारये भी पढ़ें:ये भ्रमतंत्र है, सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफे के बाद क्या-क्या कह गए अलंकार पहले ही प्रयास में मिली कामयाबी अलंकार ने अपनी तैयारी के दौरान 'लो-प्रोफाइल' बने रहने और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाने की रणनीति अपनाई। उनका मानना था कि सिविल सेवा एक तपस्या है, जिसमें धैर्य की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। इसी एकाग्रता का परिणाम था कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यूपीपीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की और 'डिप्टी कलेक्टर' (एसडीएम) जैसा प्रतिष्ठित पद हासिल किया।


पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच फिर ‘सेटिंग’ की चर्चा तेज
MBA छात्रा मर्डर केस: शक, चाहत और नशे ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
India-Bangladesh: 'बीसीसीआई और भारत के साथ बेहतर संबंध चाहते हैं', बांग्लादेश के खेल मंत्री अमीनुल हक का बयान
शिवाजी महाराज पर आधारित हैं ये फिल्में, इन कलाकारों ने पर्दे पर निभाया उनका किरदार
Bangladesh Cricket: सरकार बदली, सुर बदले! बांग्लादेश के नए खेल मंत्री ने कहा- शाकिब-मुर्तजा की वापसी चाहते हैं
CG Rajya Sabha Election: छत्तीसगढ़ की 2 राज्यसभा सीटों पर चुनाव, जानें BJP-कांग्रेस से कौन से नाम हैं आगे
रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी! छत्तीसगढ़ से होकर चलेंगी ये 15 होली स्पेशल ट्रेनें, जानें किन स्टेशनों में होगा स्टॉपेज
महाकाल मंदिर में भक्तों के लिए बड़ी खबर: संध्या और शयन आरती अब पूरी तरह ऑनलाइन
CG – सेंट्रल जेल में कैदी ने हंसिया से काटा खुद का गला, मचा हड़कंप…..इस मामले में काट रहा है सजा…..
आपसी दुश्मनी या अनसुलझे विवाद… पेट्रोल छिड़ककर युवक को जिंदा जलाया, वारदात सुन कांप उठी रूह