महिला को मारने वाले टाइगर की भी मौत, दोबारा जांच करेगी टीम
जबलपुर/उमरिया। मध्यप्रदेश के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ पनपथा रेंज के खेरवाटोला गांव में रविवार, 24 मई की तड़के जंगल से भटककर आए एक नर बाघ ने ग्रामीण महिला पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे महिला की मौके पर ही मौत हो गई। दिल दहला देने वाली इस घटना के कुछ ही घंटों बाद रेस्क्यू किए गए बाघ की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृत बाघ के शव को पोस्टमार्टम और मौत के असली कारणों का पता लगाने के लिए जबलपुर के वेटरनरी विश्वविद्यालय स्थित 'स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ' (SWFH) लाया गया है।
शव के पास 6 घंटे बैठा रहा बाघ; ट्रेंकुलाइज करने के बाद तोड़ा दम
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, महिला का शिकार करने के बाद नर बाघ करीब छह घंटे तक मृतका के शव के पास ही डटा रहा। इस भयानक मंजर को देखकर गांव में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और बाघ को काबू में करने के लिए दो हाथियों की मदद ली गई। काफी मशक्कत के बाद टीम ने बाघ को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) किया, लेकिन पिंजरे में कैद होने के कुछ ही देर बाद बाघ ने दम तोड़ दिया। वन्यजीव विशेषज्ञों का अंदेशा है कि बाघ की मौत दवा के ओवरडोज या फिर समय पर एंटीडोज न मिल पाने की वजह से हुई हो सकती है।
गुस्साए ग्रामीणों का वनकर्मियों पर हिंसक हमला, कई कर्मचारी घायल
इस हादसे ने स्थानीय ग्रामीणों के आक्रोश को भड़का दिया। जैसे ही वन विभाग की टीम रेस्क्यू के लिए गांव की गौशाला के पास पहुंची, उत्तेजित ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से वनकर्मियों पर हिंसक हमला कर दिया। ग्रामीणों के इस अचानक हमले में कई वन कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया है। गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की ₹25 लाख के मुआवजे और मुफ्त इलाज की घोषणा
इस दुखद घटना पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मृत महिला फूलबाई पाल के पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि देने की बड़ी घोषणा की है। इसके साथ ही, बाघ के हमले में घायल हुए परिवार के अन्य चार सदस्यों के समुचित और पूरी तरह से मुफ्त इलाज कराने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए हैं।
एनटीसीए (NTCA) की निगरानी में जबलपुर में दोबारा होगा शव का परीक्षण
बाघ की संदिग्ध मौत को देखते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के कड़े प्रोटोकॉल के तहत जांच शुरू कर दी गई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) समीता राजौरा के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों और दिल्ली एनटीसीए के निर्देश पर नागपुर क्षेत्रीय कार्यालय के प्रतिनिधि की मौजूदगी में बाघ का दोबारा परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम (डॉ. निधि राजपूत, डॉ. अभय संगेर और डॉ. प्रशांत देशमुख) गठित की गई है। फिलहाल बाघ के शव को सुरक्षित रखने के लिए जबलपुर के एसडबलूएफएच (SWFH) के डीप फ्रीजर में रखा गया है, जहां हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की अंतिम वजह साफ हो सकेगी।


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