राज्यसभा को लेकर ठाकरे परिवार सख्त, पवार पर नहीं दिखाया भरोसा
मुंबई। शरद पवार को राज्यसभा भेजने के मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे) निर्णय से खुश नहीं। ठाकरे परिवार ने पहले ही शरद पवार का समर्थन नहीं करने का मन बनाया था, हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बारे में नहीं कहा गया। इसकी वजह हैं कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के बीच विलय की अटकलें चल रही हैं, और अब शिवसेना यूबीटी को लगता है कि एनसीपी भरोसेमंद सहयोगी नहीं है। इसलिए ठाकरे परिवार पवार को राज्यसभा में भेजने को लेकर खुश नहीं था।
एक अखबार से बात करते हुए शिवसेना यूबीटी के नेताओं ने कहा कि वर्तमान में एनसीपी को महाविकास अघाड़ी में भरोसा नहीं किया जा सकता। सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल ने उद्धव से पवार की उम्मीदवारी के समर्थन के लिए मुलाकात की, लेकिन चर्चा के बावजूद ठाकरे ने यह स्पष्ट किया कि वह पवार का सम्मान करते हैं, पर शिवसेना यूबीटी अपना उम्मीदवार ही राज्यसभा भेजेगी। इतना ही नहीं आदित्य ठाकरे ने संकेत दिए कि केवल शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस ही केंद्र में भाजपा सरकार के खिलाफ खड़ी हैं और गठबंधन में शामिल कुछ दल गुप्त बैठकों में मोदी सरकार से संपर्क कर रहे हैं, इसलिए उनका समर्थन नहीं होना चाहिए।
लेकिन कांग्रेस ने पवार की उम्मीदवारी का समर्थन किया। लोकसभा सांसद सुले ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की थी। शिवसेना यूबीटी के अनुसार, कांग्रेस के समर्थन से उन्हें पवार का विरोध करना मुश्किल हो गया क्योंकि न वे खुद उम्मीदवार चुन सकते थे और न कांग्रेस से अलग जा सकते थे। ठाकरे परिवार के नाराज होने का संकेत आदित्य के बयान से मिलता है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा है और उन्हें 2028 तक अपने उम्मीदवार को चुनाव में उतारने का मौका नहीं मिलेगा। राज्यसभा के चुनाव में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, भाजपा महासचिव विनोद तावड़े, रामराव वडुकुटे, माया इवनाते और शिवसेना की ज्योति वाघमारे भी निर्वाचित हुईं। एनसीपी से पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार भी राज्यसभा पहुंचे। सात सीटों के लिए केवल सात उम्मीदवार होने के कारण मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी। इस पूरी प्रक्रिया ने महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर को जटिल बना दिया है, जहां गठबंधन में भरोसे और रणनीति को लेकर सत्ताधारी दलों के बीच मतभेद उजागर हुए हैं।


भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना बनी आर्थिक संबल
बाल श्रम पर जीरो टॉलरेंस, हर मुक्त बच्चे के पुनर्वास पर होगा विशेष फोकस
महिला एशियन चैंपियनशिप की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग नाथुबरखेड़ा अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का किया निरीक्षण
समान नागरिक संहिता को व्यापक जनसमर्थन
माँ चन्द्रहासिनी आरोग्य धाम बनेगा जनसेवा का नया केंद्र : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
धमतरी जिले में 200 एकड़ से बढ़ाकर 600 एकड़ तक औषधीय खेती के विस्तार का लक्ष्य
मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर अपराधियों पर लगातार कार्रवाई
इंदौर और विकास हैं एक दूसरे के पर्याय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
कृषि में छत्तीसगढ़ का नया अध्याय बनाया धमतरी जिले ने
इरादों की स्याही से किशन जंगम ने लिखी सफलता की नई इबारत