एक छात्र ने 18 बच्चों को काटा, जांच रिपोर्ट में सामने आई हैरान करने वाली बात
धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिलौटी में एक छात्र की बेहद अजीबोगरीब और हैरान करने वाली हरकत के कारण पूरे स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया। यहां कक्षा 11वीं में पढ़ने वाले एक छात्र ने बीते एक सप्ताह के दौरान अलग-अलग कक्षाओं में जाकर अपने ही 18 सहपाठियों (क्लासमेट्स) को दांतों से बुरी तरह काट लिया। इस विचित्र घटना के सामने आने के बाद स्कूल प्रशासन, शिक्षक और पीड़ित बच्चों के अभिभावकों के बीच भारी चिंता और दहशत का माहौल निर्मित हो गया। इस बीच, जब ग्रामीणों को यह जानकारी मिली कि संबंधित छात्र को कुछ वर्ष पूर्व एक पागल कुत्ते ने काटा था, तो पूरे इलाके में रेबीज संक्रमण फैलने की अफवाहें और तरह-तरह की डरावनी चर्चाएं तेजी से शुरू हो गईं। हालांकि, जिला स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरी चिकित्सीय जांच कराई और इन सभी आशंकाओं व अफवाहों को पूरी तरह से निराधार और गलत करार दिया है।
छात्रों के शरीर पर मिलने लगे दांतों के निशान, तब स्कूल प्रबंधन ने स्वास्थ्य विभाग को किया अलर्ट
शुरुआती दिनों में जब एक-दो बच्चों ने इसकी शिकायत की, तो स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने इसे बच्चों के बीच की एक सामान्य आपसी शरारत या खेल-कूद का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर दिया था। परंतु, जब पिछले तीन-चार दिनों के भीतर पीड़ित छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई और कई छात्र इस अजीब व्यवहार का शिकार होकर रोते हुए प्राचार्य कक्ष पहुंचे, तब स्कूल प्रशासन के कान खड़े हुए। प्रबंधन ने बिना कोई देरी किए तुरंत इसकी लिखित सूचना जिला स्वास्थ्य विभाग और खंड चिकित्सा अधिकारी को दी। इसके बाद प्रशासनिक निर्देश पर डॉक्टरों की एक विशेष टीम स्कूल पहुंची और पूरे मामले की गहन चिकित्सकीय जांच शुरू की गई।
18 पीड़ित छात्रों को एहतियात के तौर पर लगाया गया एंटी-रेबीज का सुरक्षा टीका
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त्वरित उपचार: स्वास्थ्य विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभावित सभी 18 छात्र-छात्राओं को तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ले जाकर उनका विस्तृत शारीरिक परीक्षण किया।
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वैक्सीनेशन: यद्यपि किसी भी बच्चे को रेबीज का कोई खतरा नहीं था, फिर भी डॉक्टरों ने एहतियात और सुरक्षा के दृष्टिकोण से सभी 18 प्रभावित छात्रों को एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) का पहला डोज लगा दिया है ताकि अभिभावक पूरी तरह तनावमुक्त हो सकें।
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मनोवैज्ञानिक जांच: वहीं दूसरी ओर, काटने वाले संबंधित छात्र को एम्बुलेंस के माध्यम से सीधे जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा उसका संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ-साथ उसकी गहन मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग (Psychological Counseling) भी कराई गई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी का बड़ा बयान: 'छात्र में रेबीज के शून्य लक्षण, अफवाहों से बचें लोग'
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लक्षणों का अभाव: इस पूरे सनसनीखेज मामले पर धमतरी के जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. जे.पी. दीवान ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए छात्र में रेबीज की किसी भी संभावना से पूरी तरह इनकार किया है। उन्होंने तकनीकी रूप से स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति रेबीज से संक्रमित होता है, तो उसमें हाइड्रोफोबिया (पानी से अत्यधिक डर लगना), तेज रोशनी या तेज आवाज से चिड़चिड़ापन, भोजन या पानी निगलने में भयानक कठिनाई और गंभीर मानसिक असामान्यता जैसे स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं। इसके विपरीत, जांच के दौरान संबंधित छात्र पूरी तरह शांत और सामान्य पाया गया है।
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पूर्व में हुआ था पूर्ण टीकाकरण: धमतरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. यू.एल. कौशिक ने बताया कि छात्र के पारिवारिक मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार, उसे तीन वर्ष पहले एक श्वान (कुत्ते) ने काटा था, परंतु उस समय उसके परिजनों ने समय रहते अस्पताल ले जाकर उसका पूरा एंटी-रेबीज टीकाकरण कोर्स मुस्तैदी से कराया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि काटे गए 18 छात्रों में से किसी को भी गंभीर चोट या ब्लीडिंग नहीं हुई है, केवल एक छात्र की पीठ पर हल्के दांत के निशान पाए गए हैं, जो अब पूरी तरह ठीक है।
कबड्डी के खेल में मिली करारी हार के बाद शुरू हुआ था दोस्तों को काटने का यह अजीब खेल
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काउंसलिंग में खुलासा: जिला अस्पताल के मनोचिकित्सकों द्वारा की गई काउंसलिंग के दौरान संबंधित छात्र ने रोते हुए इस अजीब व्यवहार के पीछे की असली वजह का खुलासा किया। छात्र ने बताया कि कुछ दिन पहले स्कूल में आयोजित एक कबड्डी मैच के दौरान उसकी टीम बुरी तरह हार गई थी, जिसके बाद उसके दोस्त उसका मजाक उड़ा रहे थे।
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मजाक बना सिरदर्द: इसी हताशा और गुस्से में उसने खेल के मैदान में ही मजाक और चिढ़ाने के तौर पर अपने दोस्तों को पहली बार दांत से काटा था। जब दोस्तों में इसका डर दिखने लगा, तो उसने इसे एक खेल समझ लिया और अन्य सहपाठियों के साथ भी यही हरकत दोहराने लगा। डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से प्रमाणित किया है कि छात्र मानसिक और शारीरिक रूप से 100 प्रतिशत स्वस्थ है और उसे कोई गंभीर बीमारी नहीं है।
भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्कूल परिसर में नियमित रूप से होगी काउंसलिंग
धमतरी: इस पूरे घटनाक्रम के पटाक्षेप के बाद अब जिला शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन इस पूरे मामले को बीमारी के बजाय अनुशासनहीनता और व्यवहार सुधार (Behavioral Modification) के दृष्टिकोण से देख रहे हैं। शाला विकास समिति ने निर्णय लिया है कि आगामी दिनों में स्कूल में छात्र की नियमित रूप से प्रोफेशनल काउंसलिंग कराई जाएगी ताकि उसके व्यवहार को सुधारा जा सके और भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति स्कूल परिसर में न हो। प्रशासन ने धमतरी और कुरूद अंचल के नागरिकों से विशेष अपील की है कि वे सोशल मीडिया या वाट्सएप ग्रुप्स पर चल रही किसी भी प्रकार की रेबीज संबंधी भ्रामक अफवाहों पर बिल्कुल भी भरोसा न करें और केवल स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी इस आधिकारिक व प्रामाणिक जानकारी को ही सच मानें।


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