बिहार परिणाम के बाद सपा का बदला तेवर: अब मायावती पर नहीं होंगे निजी हमले
लखनऊ। बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों को देखते हुए सपा ने अपने तेवर बदल लिए हैं। इसके चलते अब मायावती पर किसी भी तरह के निजी हमले नहीं करने के सख्त निर्देश अखिलेश यादव ने दिए हैं। दरअसल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है। यह कदम भी उसी का हिस्सा माना जा रहा है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सभी मीडिया पैनलिस्टों को साफ निर्देश दे दिए हैं कि बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती पर किसी भी प्रकार के निजी हमले नहीं किए जाएं। यह फैसला बिहार चुनाव 2025 में विपक्षी महागठबंधन की करारी हार के बाद लिया गया बताया जा रहा है। पिछले कुछ समय में सपा द्वारा मायावती और बसपा को लगातार भाजपा की बी टीम कहकर निशाने पर लिया जाता रहा है। लेकिन पार्टी के भीतर अब यह समझ बन रही है कि मायावती पर हमले दलित वोट बैंक पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं, जो आने वाले चुनावों में सपा के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि सपा के कई प्रवक्ताओं को अखिलेश यादव ने खुद यह निर्देश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक सपा के लगभग 20 प्रवक्ता विभिन्न टीवी चैनलों पर पार्टी का पक्ष रखते हैं, इन्हीं में से कुछ ने पुष्टि की है कि बिहार चुनाव के बाद पार्टी हाईकमान की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है, कि मायावती पर निजी हमला नहीं करना है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बिहार चुनाव में महागठबंधन द्वारा बसपा और एआईएमआईएम को बी टीम कहकर खारिज करने की कोशिश उलटी पड़ गई। वहीं ओवैसी की पार्टी ने 5 सीटें जीतीं और 10 पर दूसरे स्थान पर रही, जबकि बसपा भी एक सीट जीतने में सफल रही। इसके उलट महागठबंधन की मुख्य पार्टियां खराब प्रदर्शन कर गईं। इससे स्पष्ट हुआ कि जिन दलों को बी टीम कहा जा रहा था, उन्होंने विपक्षी दलों से बेहतर प्रदर्शन कर लिया। जानकार कह रहे हैं कि सपा समझ रही है, कि यूपी का चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि स्थानीय समीकरणों पर लड़ा जाएगा। लोकसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति ने भाजपा को कठिन चुनौती दी थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में दलित वोटों का बिखराव सपा के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है। मायावती पर निजी हमले करने से दलित समाज खुद को निशाना बना हुआ महसूस करता है, जिससे दलित वोट भाजपा के खिलाफ एकजुट होने के बजाय बसपा की ओर लौट सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी में दलित मतदाताओं की अहम भूमिका को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव अब किसी भी परिस्थिति में इस वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहेंगे। इसलिए सपा की रणनीति में बड़ा बदलाव साफ दिख रहा है—अब मायावती पर निजी हमले नहीं होंगे और दलित समाज को साधने की कोशिश तेज होगी।
राजनीतिक गलियारों में यह कदम सपा की 2027 की तैयारी का अहम संकेत माना जा रहा है।


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