‘वो फाइटर थीं’, आशा ताई की मजबूती को याद कर भावुक हुए मिलिंद
सुरों की मल्लिका आशा भोसले के निधन के बाद हर कोई उनकी यादों में डूबा हुआ है। इसी बीच म्यूजिक कंपोजर मिलिंद श्रीवास्तव ने भी गायिका से जुड़ी यादें हमारे साथ साझा कीं। पढ़ें उनकी जुबानी...
Exclusive: ‘मैंने बोला गाना शाहरुख का है फिर भी…’, कंपोजर निखिल कामत ने सुनाए आशा ताई के किस्से
'ये पहले बहुत भावुक है। वो इतने दशकों से एक्टिव थीं। उनका मेरे पिताजी म्यूजिक कंपोजर चित्रगुप्त श्रीवास्तव के साथ भी गहरा जुड़ाव रहा। उन्होंने उनके लिए कई यादगार गाने गाए थे। बाद में उन्होंने हमारे लिए भी गाने गाए। हमारी जोड़ी आनंद मिलिंद के साथ भी उन्होंने खूब काम किया।'
50 साल पुराना है हमारा रिश्ता
'हमारा रिश्ता आशा और लता आंटी और उनके पूरे परिवार के साथ पिछले पचास साल से जुड़ा है। ये सिर्फ प्रोफेशनल रिश्ता नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्ता था। ये बहुत दुखद है। लेकिन मैं हमेशा ये मानता हूं कि उन्होंने एक पूरी और लंबी जिंदगी जी। जैसे लता जी भी 92 की उम्र में गईं, मेरी मां भी लगभग उसी उम्र में गईं और आशा जी भी उसी के आसपास की उम्र में गईं। फिर भी ये एक झटका है, क्योंकि हमें लगा था कि वो इससे भी निकल जाएंगी। वो हमेशा एक फाइटर रही हैं।'
पिताजी के निधन पर हमारे साथ थीं
'वो एक ऐसी इंसान थीं जो हर किसी के लिए खड़ी रहती थीं। मुझे आज भी याद है, 1991 में जब मेरे पिताजी बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती थे, वो दूसरे ही दिन उनसे मिलने आईं। उन्होंने अस्पताल के मैनेजमेंट से लेकर स्टाफ तक सबको कहा कि इस कमरे का खास ख्याल रखा जाए, ये मेरे अपने हैं। और जब पिताजी का निधन हुआ, तब भी उन्होंने खुद आगे बढ़कर सारी प्रक्रियाएं जल्दी करवाने में मदद की थी। वो सिर्फ एक महान गायिका नहीं थीं, बल्कि एक बहुत बड़ी दिल वाली इंसान थीं, जो अपने लोगों के लिए हमेशा खड़ी रहती थीं।'
पहले पहचान नहीं पाईं, फिर गले लगाया
'बीते कुछ साल में मैं उनसे ज्यादा नहीं मिल पाया। हां, कुछ साल पहले एक फंक्शन में मुलाकात हुई थी। मैंने उनके पैर छुए, नमस्ते किया, पहले वो मुझे पहचान नहीं पाईं लेकिन जैसे ही मैंने अपना नाम बताया, उन्होंने तुरंत मुझे पकड़कर गले लगा लिया। वो पल मेरे लिए बहुत खास है, बहुत प्यारी यादें हैं इस पूरे परिवार के साथ।'
वो फाइटर और परफेक्शनिस्ट थीं
'उन्होंने हर तरह के गाने गाए, क्लासिकल, फिल्मी, गजल पॉप, हर जॉनर में वो परफेक्ट थीं। हमने भी उनके साथ काम किया और हमेशा यही देखा कि वो एक परफेक्शनिस्ट थीं और बहुत जल्दी सीखने वाली थीं। उनके बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है, उनकी महानता पूरी दुनिया जानती है। वो हमेशा एक फाइटर रहीं, इसलिए दिल मानने को तैयार नहीं होता कि वो अब हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनकी आवाज, उनकी यादें और उनका प्यार हमेशा हमारे साथ रहेगा। दो शब्द में कहूं तो वे फाइटर और परफेक्शनिस्ट थीं।'


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