SBI का दावा: अनिश्चितता के दौर में लोग ज्यादा कैश रखने लगे
नई दिल्ली। एसबीआई रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था में नकद और डिजिटल भुगतान एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में उभर रहे हैं। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि जहाँ छोटे खर्चों और दैनिक खरीदारी के लिए लोग यूपीआई (UPI) पर भरोसा कर रहे हैं, वहीं आपातकालीन स्थितियों और बचत के लिए आज भी नकदी को प्राथमिकता दी जा रही है।
ई-रुपया (CBDC): चुनौतियां और संभावनाएं
डिजिटल मुद्रा यानी ई-रुपये को लेकर रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल इसका चलन काफी सीमित है। मार्च 2025 तक बाजार में केवल 1,016 करोड़ रुपये मूल्य का ई-रुपया प्रचलन में था। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे लोकप्रिय बनाने के लिए लोगों को जागरूक करने और फिनटेक कंपनियों के साथ मिलकर इसे और अधिक सुलभ बनाने की आवश्यकता है।
प्रति व्यक्ति आय और नकदी का गणित
अध्ययन में आय और नकदी के उपयोग के बीच एक दिलचस्प संबंध साझा किया गया है:
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जीडीपी में वृद्धि: वित्त वर्ष 2012 में प्रति व्यक्ति जीडीपी 71,609 रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2026 तक बढ़कर 2,51,393 रुपये हो गई है।
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नकदी का उपयोग: इसी अवधि में प्रति व्यक्ति नकदी का चलन 8,762 रुपये से बढ़कर 29,324 रुपये हो गया है।
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रिपोर्ट के अनुसार, आय और नकदी की वृद्धि दर में जो मामूली अंतर है, वह डिजिटल माध्यम (UPI) की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
एहतियातन नकदी जमा करने की बढ़ती प्रवृत्ति
रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया है कि लोग अब अपने पास अधिक नकदी जमा रख रहे हैं। वित्त वर्ष 2024 में प्रति व्यक्ति नकदी भंडारण और एटीएम निकासी के बीच का अंतर 1,804 रुपये था, जो 2026 में पांच गुना बढ़कर 9,127 रुपये हो गया है। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि वैश्विक तनाव और युद्ध जैसी अनिश्चित परिस्थितियों के कारण लोग सुरक्षा के लिहाज से अपने पास ज्यादा कैश रखना पसंद कर रहे हैं।
नोटों का प्रचलन: 500 रुपये के नोटों की प्रधानता
भारतीय बाजार में मूल्य के हिसाब से 500 रुपये के नोटों का वर्चस्व बना हुआ है:
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दबदबा: मार्च 2025 तक कुल नकदी मूल्य का 86% हिस्सा अकेले 500 रुपये के नोटों का था।
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छोटे नोटों पर जोर: इस असंतुलन को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को एटीएम में 100 और 200 रुपये के नोट अधिक संख्या में डालने के निर्देश दिए हैं।
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सुधार के संकेत: आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक 100 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 6.2% से बढ़कर 8.2% हो गई है, जो छोटे नोटों की बेहतर उपलब्धता की ओर इशारा करती है।


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