कपिल सिब्बल का बयान: मतगणना केंद्रों पर राज्य सरकार के कर्मचारी जरूरी
बंगाल चुनाव: मतगणना की पारदर्शिता पर कपिल सिब्बल का सुझाव, दक्षिण 24 परगना में धमकियों के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन
कोलकाता/फाल्टा। पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों से पहले सरगर्मियां तेज हैं। मतगणना प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कानूनी और जमीनी स्तर पर खींचतान जारी है।
मतगणना टेबल पर तैनाती को लेकर सिब्बल का तर्क
वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने चुनाव प्रक्रिया की शुचिता पर जोर देते हुए एक अहम सुझाव दिया है:
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राज्य कर्मचारियों की भूमिका: सिब्बल का मानना है कि वोटों की गिनती के दौरान हर टेबल पर राज्य सरकार के एक कर्मचारी की मौजूदगी अनिवार्य होनी चाहिए। इससे सभी राजनीतिक दलों में समानता का भाव रहेगा।
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सुप्रीम कोर्ट का रुख: यह मामला शीर्ष अदालत तक भी पहुँचा, जहाँ कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतगणना कर्मियों की नियुक्ति का अंतिम अधिकार चुनाव आयोग के पास है। अदालत ने आयोग के मौजूदा सर्कुलर को सही ठहराया है।
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आयोग का आश्वासन: चुनाव आयोग ने भरोसा दिया है कि मतगणना में केंद्र और राज्य दोनों के कर्मचारी शामिल होंगे और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
फाल्टा में तनाव: "5 मई के बाद खून-खराबे" की धमकी का आरोप
दक्षिण 24 परगना जिले के हसिमनगर गांव में शनिवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। यहाँ सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया।
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दहशत का माहौल: भाजपा महिला मोर्चा की फातिमा बीबी सहित कई ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें 4 मई (गिनती के दिन) के बाद जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
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सत्तारूढ़ दल पर आरोप: प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय पंचायत प्रधान इसराफिल और टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के समर्थकों पर डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों की मांग है कि इलाके में CRPF की तैनाती चुनाव के बाद भी जारी रहे।
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प्रशासनिक मुस्तैदी: भारी तनाव को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बल (CRPF) के आला अधिकारी अतिरिक्त फोर्स के साथ मौके पर पहुँचे और लोगों को सुरक्षा का वचन दिया। चुनाव आयोग ने भी जिला प्रशासन से इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
टीएमसी की सफाई: "यह भाजपा की साजिश है"
इन गंभीर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने इन्हें सिरे से खारिज कर दिया है।
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उनका कहना है कि भाजपा हार के डर से टीएमसी कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फंसाने और उनका मनोबल तोड़ने के लिए इस तरह के प्रदर्शन करवा रही है।
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खान ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी आरोप सिद्ध होता है, तो वे कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं।


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