अल नीनो का साया, जलाशयों का जलस्तर घटा, बिजली उत्पादन पर असर
नई दिल्ली: भारत में इस समय सुपर अलनीनो का असर साफ तौर पर दिखने लगा है, जिसकी वजह से मानसून की रफ्तार काफी सुस्त पड़ गई है। देश में अब तक सामान्य के मुकाबले करीब 40 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, जिसने आने वाले समय के लिए जल संकट की बड़ी चेतावनी दे दी है। कम बारिश का सीधा असर देश के जल स्रोतों पर पड़ा है और भारत के 166 प्रमुख जलाशयों (बांधों) में पानी का कुल स्टॉक घटकर उनकी क्षमता का महज 27.5 फीसदी ही रह गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि मौजूदा जलस्तर पिछले 10 साल के औसत रिकॉर्ड से थोड़ा बेहतर है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों और जल प्रबंधन के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर मानसून की यही सुस्ती जारी रही, तो आने वाले हफ्तों में खेती-किसानी, पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए स्थितियां बेहद गंभीर हो सकती हैं।
बिजली उत्पादन और लाइव स्टोरेज पर सीधा असर
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, देश के इन प्रमुख जलाशयों की कुल लाइव पानी रखने की क्षमता लगभग 183.6 बिलियन क्यूबिक मीटर है। जलाशयों का सूखना देश की ऊर्जा व्यवस्था के लिए भी एक बड़ा खतरा है क्योंकि इनमें से 20 प्रमुख जलाशयों से बड़ी जलविद्युत (हाइड्रोपावर) परियोजनाएं संचालित होती हैं। पानी का स्तर लगातार गिरने से इन केंद्रों में बिजली का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे आने वाले दिनों में देश के कई राज्यों को गंभीर बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है।
मानसून की सुस्त चाल और घटता जलस्तर
इस वर्ष मानसून की शुरुआत बेहद कमजोर और उम्मीद से काफी धीमी रही है। मानसून ने तय समय से तीन दिन की देरी से केरल में दस्तक दी और उसके बाद भी आगे बढ़ने की इसकी रफ्तार बहुत सुस्त बनी हुई है। मौसम विभाग का कहना है कि देश के कई हिस्सों में बादल तो छाए हैं लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हो रही है। जानकारों के मुताबिक, यदि जून के आखिरी और जुलाई के शुरुआती हफ्तों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खरीफ फसलों की बुवाई, सिंचाई और उद्योगों के काम पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। फिलहाल अब देश की पूरी कृषि और जल भंडारण का भविष्य जुलाई के महीने में होने वाली झमाझम बारिश पर निर्भर करता है।
कुछ राज्यों में हालात बेहतर, कहीं मंडराया संकट
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़े बताते हैं कि पानी की यह किल्लत पूरे देश में एक जैसी नहीं है। उत्तर और मध्य भारत के कुछ जलाशयों में पिछले साल की तुलना में बेहतर पानी जमा है, जबकि पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के राज्यों में स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है।
अगर राज्यवार स्थिति को देखें, तो असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के जलाशयों में पिछले साल के मुकाबले पानी का स्टॉक काफी बेहतर दर्ज किया गया है। इसके विपरीत, आंध्र प्रदेश, गोवा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जलाशयों का पानी पिछले साल की तुलना में काफी नीचे चला गया है, जिससे इन क्षेत्रों में आने वाले दिनों में सूखे जैसी स्थिति और जल संकट गहराने की पूरी आशंका है।


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