उज्जैन की वैदिक घड़ी की नई तकनीकी प्रस्तुति, CM मोहन यादव को भेंट हुई रिस्ट वॉच
भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग अंतर्गत ‘श्रीकृष्ण पाथेय न्यास’ द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0’ (Vikramaditya Vedic Clock 2.0) के वॉल वर्जन का भव्य लोकार्पण किया। इस अवसर पर महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी एवं वैदिक रिस्ट वॉच के अन्वेषक मयंक पाटीदार ने मुख्यमंत्री को विशेष रूप से तैयार की गई वैदिक रिस्ट वॉच भी भेंट की। यह घड़ी प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, खगोलीय गणित और आधुनिक वियरेबल तकनीक (Wearable Technology) के अद्भुत समन्वय का परिणाम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव पर विकसित हुआ परिष्कृत मॉडल
विगत दिनों काशी विश्वनाथ मंदिर में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के अवलोकन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें प्राचीन काल की खगोलीय गणनाओं को समाहित करने और इसे अधिक उन्नत बनाने का सुझाव दिया था। प्रधानमंत्री के इसी मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में दुनिया में पहली बार इस प्रकार की परिष्कृत वैदिक घड़ी विकसित की गई है। इसके माध्यम से त्रेतायुग और द्वापरयुग से लेकर वर्तमान काल तक के विशाल कालखंड को भारतीय कालगणना के संदर्भ में समझा जा सकता है।

19 प्रमुख पंचांगीय तत्व और नवग्रहों की सटीक स्थिति
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 भारतीय पंचांग और खगोलीय घटनाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराती है।
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19 वैदिक तत्व समाहित: इस प्रणाली में वैदिक समय के साथ-साथ मुहूर्त, कला, काष्ठा, सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, चंद्रास्त, सूर्य-चंद्र राशि, तिथि, पक्ष, हिंदू मास, नक्षत्र, योग, करण और चौघड़िया प्रदर्शित होते हैं।
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जटिल पंचांगीय गणनाएं: घड़ी में वृद्धि तिथि, अधिक मास और क्षय मास जैसी जटिल पंचांगीय स्थिति का सटीक आकलन शामिल है।
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ग्रहों का गोचर: इसमें सूर्य और चंद्रमा के साथ नवग्रहों की वर्तमान स्थिति, राशि परिवर्तन और उनकी मार्गी-वक्री गति का भी पूरा विवरण दिखाई देता है।
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ऑफलाइन कार्यप्रणाली: इस घड़ी की मूल कालगणना प्रणाली पूरी तरह से ऑफलाइन काम करती है, जिससे इसके संचालन के लिए निरंतर इंटरनेट की आवश्यकता नहीं पड़ती।
त्रेता-द्वापर का काल बताएगी घड़ी: 21 लाख वर्ष पुरानी गणना संभव
इस घड़ी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दीर्घकालीन कालगणना क्षमता है। इसमें लगभग 21 लाख वर्ष पूर्व तक की पंचांगीय गणनाओं का अध्ययन करने तथा भविष्य के आगामी 5 लाख वर्षों तक की कालगणना देखने की अनूठी तकनीकी सुविधा विकसित की गई है। किसी भी निर्धारित तिथि को चुनकर उस कालखंड के नक्षत्र, योग, तिथि और अन्य खगोलीय विवरणों को आसानी से देखा जा सकता है।
अब स्मार्ट रिस्ट वॉच में उपलब्ध, मिलेगा 'एनर्जी मॉडल' का विश्लेषण
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 को वॉल क्लॉक के साथ-साथ स्मार्ट रिस्ट वॉच के रूप में भी तैयार किया गया है। यह रिस्ट वॉच यूजर के स्थान, अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) के आधार पर सटीक वैदिक समय और पंचांगीय डेटा प्रस्तुत करती है। इसके अलावा इसमें एक विशेष 'एनर्जी फीचर' (Energy Model) जोड़ा गया है, जो यूजर की जन्म तिथि, जन्म समय और स्थान के ज्योतिषीय आकलन के आधार पर उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, आत्मिक और कार्मिक ऊर्जा के दैनिक परिवर्तनों का विश्लेषण प्रदान करता है।


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