पत्नी की क्रूरता को माफ करने के बाद पति तलाक का हकदार नहीं: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट
CG News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तलाक के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है. बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तलाक की एक अर्जी को इसलिए निरस्त कर दिया क्योंकि पति ने पत्नी की ओर से की गई क्रूरता को माफ कर दिया था. कोर्ट की ओर से कहा गया कि पत्नी की क्रूरता को माफ करने के बाद पति तलाक का हकदार नहीं है
जानें क्या है पूरा मामला
हाई कोर्ट ने निचली अदालत से पारित तलाक की डिग्री को निरस्त करते हुए कहा कि पति ने पत्नी की ओर से किए गए क्रूरता के पिछले कृत्य को माफ कर दिया था. पति ने न केवल आईपीसी दर्ज करने और उसके परिवार के सदस्य पर आईपीसी की धारा 498-ए के तहत अपराध के लिए मुकदमा चलाने के पत्नी के कृत्य को माफ कर दिया, बल्कि 7 साल की लंबी अवधि तक पति-पत्नी के रूप में एक साथ रहकर वैवाहिक संबंध को भी बहाल किया.
दरअसल, पति ने पत्नी की तरफ से गैर पुरूष के साथ किए गए किसी भी सेक्सुअल एक्ट को भी माफ कर दिया था. प्रावधानों के आधार पर पति 1955 के अधिनियम की धारा 13(1) के तहत बताए गए आधार पर शादी को खत्म करने की डिक्री का हकदार नहीं है.
अपीलकर्ता पत्नी की प्रतिवादी से वर्ष 2003 में विवाह हुआ था. शादी के पांच साल बाद पत्नी ने दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करा पति एवं उसके परिवार वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 498 ए के तहत एफआईआर दर्ज कराई. विचारण न्यायालय ने 2009 में पति एवं उसके परिवार वालों को आईपीसी की धारा 498 ए से दोषमुक्त किया. दोषमुक्त होने के बाद दोनों 2010 से 2017 तक पति-पत्नी के रूप में साथ रहकर वैवाहिक जीवन का निर्वहन करते रहे. 17 दिसंबर 2017 को पत्नी पति का घर छोड़कर चली गई. इसके बाद पति ने परिवार न्यायालय में तलाक के लिए 2020 में आवेदन दिया. आवेदन में पत्नी की ओर से क्रूरता साबित करने 498 ए के तहत दर्ज कराई गई एफआईआर एवं पत्नी का अन्य पुरूष से संबंध होने की बात कही गई. परिवार न्यायालय ने इसे क्रूरता मानते हुए पति के पक्ष में तलाक का डिग्री पारित किया.


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