बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती, दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग बनाने की तैयारी
नई दिल्ली: भारत रचेगा इतिहास, शिंकुन ला दर्रे के नीचे बन रही दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग अगस्त 2028 तक होगी तैयार
हिमाचल प्रदेश और लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों के बीच भारत एक ऐसा इंजीनियरिंग चमत्कार तैयार कर रहा है, जो पूरी दुनिया को हैरान कर देगा। शिंकुन ला सुरंग का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जो पूर्ण होने के बाद विश्व की सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित मोटर मार्ग सुरंग बन जाएगी। 15,800 फीट की गगनचुंबी ऊंचाई पर बन रही यह सुरंग न केवल तकनीकी कौशल का प्रतीक है, बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा सड़क संगठन द्वारा 'प्रोजेक्ट योजक' के तहत इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारा जा रहा है, जिसकी शुरुआत जुलाई 2024 में हुई थी और इसके अगस्त 2028 तक पूरी तरह से संचालित होने की संभावना है।
लाहौल और जंस्कार घाटी के बीच हर मौसम में सुगम होगा सफर
इस सुरंग का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यह हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी को लद्दाख की जंस्कार घाटी से सीधे जोड़ देगी, जिससे साल भर आवाजाही संभव हो सकेगी। वर्तमान में भारी बर्फबारी के कारण यह मार्ग सर्दियों में महीनों तक बंद रहता है, लेकिन 4.1 किलोमीटर लंबी यह ट्विन-ट्यूब सुरंग निमू-पदम-दारचा सड़क मार्ग पर बारहमासी संपर्क सुनिश्चित करेगी। केंद्र सरकार ने इस विशाल परियोजना के लिए 1681 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को एक नई दिशा प्रदान करेगा। यह सुरंग बन जाने के बाद दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आपातकालीन सेवाएं और रसद पहुंचना काफी आसान हो जाएगा।
सुरक्षा के आधुनिक मानक और आपातकालीन निकास की विशेष व्यवस्था
तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो शिंकुन ला सुरंग में यात्रियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है और इसमें हर 500 मीटर की दूरी पर क्रॉस-पैसेज बनाए जा रहे हैं। ये क्रॉस-पैसेज दो समानांतर सुरंगों को जोड़ने वाली संकरी गलियां होती हैं, जिनका उपयोग किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी या सुरंग के रखरखाव के कार्यों के लिए किया जाता है। आधुनिक वेंटिलेशन और सुरक्षा प्रणालियों से लैस यह सुरंग अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाई जा रही है ताकि ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में ऑक्सीजन और दबाव की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
सीमा पर सैन्य मजबूती और लद्दाख के सामाजिक विकास को मिलेगी नई गति
सामरिक महत्व के लिहाज से यह सुरंग भारतीय सशस्त्र बलों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी क्योंकि इसके माध्यम से चीन सीमा के करीब सैनिकों और भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेज और गोपनीय तरीके से हो सकेगी। युद्ध जैसी स्थितियों में यह मार्ग रसद आपूर्ति की जीवनरेखा बनेगा। इसके साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी के चलते लद्दाख के सुदूर क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिलेगी, जिससे इस केंद्र शासित प्रदेश में आर्थिक और सामाजिक समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे। यह सुरंग न केवल लद्दाख के पिछड़े इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ेगी, बल्कि वहां के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।


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