लद्दाख संकट पर बड़ा कदम, 22 मई को गृह मंत्रालय की अहम बैठक
जम्मू/लेह | लद्दाख के भविष्य और संवैधानिक अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय संगठनों के बीच जारी महीनों का तनाव अब कम होता दिख रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए आगामी 22 मई को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उप-समिति (Sub-committee) की बैठक बुलाई है। इस पहल को लद्दाख क्षेत्र में शांति बहाली और लोकतांत्रिक संवाद की दिशा में एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
एलजी विनय कुमार सक्सेना ने की पुष्टि
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के माध्यम से इस बैठक की आधिकारिक घोषणा की।
उपराज्यपाल का संदेश: "मुझे यह बताते हुए खुशी है कि गृह मंत्रालय ने 22 मई को बातचीत का निर्णय लिया है। उम्मीद है कि इस रचनात्मक संवाद से क्षेत्र की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने और स्थायी समाधान निकालने में मदद मिलेगी।"
कौन-कौन होगा शामिल?
इस महत्वपूर्ण बैठक में लद्दाख की आवाज बुलंद करने वाले दो प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे:
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लेह अपेक्स बॉडी (LAB): तीन सदस्य।
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कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA): तीन सदस्य।
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इसके अलावा अन्य प्रमुख हितधारक और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी टेबल पर मौजूद रहेंगे।
पृष्ठभूमि: क्यों रुकी थी बातचीत?
लद्दाख में अधिकारों की मांग को लेकर संघर्ष काफी लंबा रहा है:
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हिंसक प्रदर्शन: सितंबर 2025 में लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, जिसमें 4 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद से ही सरकार और संगठनों के बीच संवाद का रास्ता लगभग बंद हो गया था।
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फरवरी की बैठक: 4 फरवरी को बातचीत की प्रक्रिया फिर शुरू हुई थी, लेकिन 'स्टेटहुड' (राज्य का दर्जा) और 'छठी अनुसूची' जैसे गंभीर मुद्दों पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका था।
मुख्य एजेंडा: क्या है लद्दाख की मांग?
22 मई की इस बैठक में लेह और कारगिल के प्रतिनिधि मंडल मुख्य रूप से इन चार मांगों पर अड़े रह सकते हैं:
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लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना।
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जनजातीय अधिकारों के संरक्षण के लिए छठी अनुसूची (6th Schedule) लागू करना।
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स्थानीय लोगों के लिए नौकरी में आरक्षण।
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लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग लोकसभा सीटें।
शाह के दौरे से पहले बड़ी रणनीतिक पहल
गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह का लद्दाख दौरा प्रस्तावित है। उनके आने से ठीक पहले बातचीत का निमंत्रण भेजना यह संकेत देता है कि केंद्र सरकार लद्दाख के संवेदनशील मुद्दों को ठंडे बस्ते से निकालकर उनका समाधान चाहती है। यह बैठक न केवल राजनीतिक गतिरोध को तोड़ेगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है।


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