छत्तीसगढ़ का गौरव: सात समंदर पार पहुंची कोसा सिल्क की चमक, कोरबा और जांजगीर बने केंद्र।
छत्तीसगढ़ के 'कोसा सिल्क' की वैश्विक चमक, पारंपरिक कारीगरी ने विदेशों में बनाई पहचान
रायपुर: छत्तीसगढ़ अपनी विशिष्ट परंपराओं और समृद्ध संस्कृति के लिए विश्वविख्यात है। इसी कड़ी में प्रदेश के कोसा सिल्क ने अपनी अनोखी बनावट और गुणवत्ता के दम पर देश-विदेश में एक बड़ी पहचान स्थापित की है। छत्तीसगढ़ में कोसा का उत्पादन मुख्य रूप से कुछ विशेष क्षेत्रों में होता है, जहाँ पारंपरिक कारीगर पीढ़ियों से इस दुर्लभ कला को जीवित रखे हुए हैं।
कोसा के प्रमुख केंद्र: प्रदेश के कोरबा और जांजगीर-चांपा जिले कोसा सिल्क के निर्माण के मुख्य केंद्र हैं। अपने विशिष्ट टेक्सचर और प्राकृतिक चमक के कारण यह रेशम पूरी दुनिया में सराहा जाता है। परंपरागत रूप से तैयार होने वाले इस रेशम को 'कोसा, कांस और कंचन' जैसी विशिष्ट श्रेणियों में पहचाना जाता है।
निर्माण की जटिल प्रक्रिया: कोसा सिल्क तैयार करने की प्रक्रिया अत्यंत धैर्य और परिश्रम की मांग करती है:
-
सर्वप्रथम जंगलों से तितलियों के लार्वा द्वारा निर्मित कोकून को एकत्रित किया जाता है।
-
बेहतर गुणवत्ता वाले कोकून को चुनकर उन्हें उबाला जाता है, जिससे रेशम का धागा अलग होता है।
-
लगभग 7 से 8 कोकून के मेल से एक लंबा धागा तैयार होता है, जिसे बाद में प्राकृतिक रंगों से रंगा जाता है।
-
धागे सूखने के बाद उनकी गड्डियां बनाई जाती हैं और फिर बुनकर इन्हें साड़ियों का रूप देते हैं।
-
एक कोसा साड़ी को पूरी तरह तैयार करने में कारीगरों को 7 से 8 दिन का समय लगता है।
हस्तशिल्प की अनूठी विशेषता: कोसा सिल्क अपनी असाधारण मजबूती, कोमलता और प्राकृतिक आभा के लिए विख्यात है। हाथों से बुना गया यह कपड़ा न केवल टिकाऊ होता है, बल्कि पहनने में भी बेहद आरामदायक होता है। स्थानीय कारीगरों के बारीक हुनर ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी धाक जमा ली है। विदेशी पर्यटकों के बढ़ते आकर्षण और बढ़ते निर्यात के कारण छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क आज सीमाओं को पार कर वैश्विक स्तर पर अपनी खूबसूरती का परचम लहरा रहा है।


राशिफल 06 मई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
विकास कार्यों में लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं, गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूरे हों कार्य: राज्यमंत्री गौर
तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में एसजीएसआईटीएस, इंदौर की "शासी निकाय की 129वीं" बैठक हुई
सिंगाजी ताप विद्युत गृह में आधुनिक रेलवे प्लेटफॉर्म का शुभारंभ
इंदौर में 9 से 13 जून तक होगा ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों का सम्मेलन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
केरवा डैम के क्षतिग्रस्त वेस्टवियर का कार्य आगामी दो माह में पूर्ण करें : जल संसाधन मंत्री सिलावट
लोक कल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए 38 हजार 555 करोड़ रूपये की स्वीकृति
बिजली उपभोक्ताओं को आवेदन करने की जरूरत नहीं, नई व्यवस्था लागू
EVM और चुनाव प्रक्रिया पर Gaurav Gogoi ने उठाए सवाल
भीषण गर्मी में राहत: सुखबासुपारा में नलकूप खनन से दूर हुई पेयजल समस्या, ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार