पुनर्वास की नई राह: इलेक्ट्रीशियन बनकर संवर रही पूर्व उग्रवादियों की जिंदगी
रायपुर | छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति का सकारात्मक असर अब जमीन पर दिखने लगा है। कोण्डागांव जिले में पहले हिंसा के रास्ते पर भटके युवा अब मुख्यधारा में लौटकर कौशल प्रशिक्षण के जरिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।जिले के पुनर्वास केंद्र में रहकर ग्राम कुधुर के तुलसी राम कश्यप, रजमन और गोबरू लाइवलीहुड कॉलेज के माध्यम से इलेक्ट्रीशियन ट्रेड का प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रशिक्षण के तहत उन्हें वायरिंग सहित तकनीकी कार्यों की जानकारी दी जा रही है, जिससे वे आगे स्वरोजगार स्थापित कर सकें।तुलसी राम कश्यप ने बताया कि पहले क्षेत्र में असुरक्षा और भय के माहौल के कारण वे भटक गए थे, लेकिन शासन की पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। अब वे प्रशिक्षण लेकर अपने गांव में ही काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं।इसी तरह रजमन और गोबरू भी प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगार शुरू कर अपने परिवार का भरण-पोषण करना चाहते हैं। तीनों युवाओं ने कहा कि इस पहल ने उन्हें नया जीवन जीने का अवसर दिया है और अब वे सुरक्षित माहौल में अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं।प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों को कौशल विकास, रोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कोण्डागांव का पुनर्वास केंद्र इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है, जहां युवाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।


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