10 अप्रैल को कालाष्टमी! भूलकर भी न करें ये काम, जानें खास नियम और उपाय
हिंदू परंपरा में हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है. यह पावन दिन भगवान शिव के रौद्र और रक्षक रूप काल भैरव को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि से पूजा करने पर भय, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं. खासतौर पर तांत्रिक साधना से जुड़े लोगों के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जब विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं. उज्जैन के ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, भगवान कालभैरव की पूजा से जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.खासतौर पर जो लोग शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या कालसर्प दोष से परेशान हैं, उनके लिए कालाष्टमी का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन किए गए विशेष उपाय कष्टों को कम करने में सहायक होते हैं. आइए जानते हैं अप्रैल में कालाष्टमी की तिथि और असरदार उपाय.
कब मनाई जाएगी कालाअस्टमी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण अष्टमी तिथि 9 अप्रैल को राज 9 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी जबकि इस तिथि का समापन 10 अप्रैल को रात 11 बजकर 15 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, इस साल वैशाख की कालाष्टमी 10 अप्रैल को मनाई जाएगी.
कालाष्टमी व्रत की महिमा
काल भैरव भगवान शिव के रौद्र और शक्तिशाली स्वरूप माने जाते हैं. मान्यता है कि जो भक्त कालाष्टमी के दिन विधि-विधान से काल भैरव बाबा की पूजा करता है, उसके जीवन के पाप, कष्ट और दुख दूर होने लगते हैं. इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखने और पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही कुंडली में मौजूद राहु दोष के प्रभाव को भी कम करने में मदद मिलती है साथ ही जो जातक शनि दोष या ढेया से परेशान है वह नीचे दिए गए उपायों को करने से इन दोषों को दूर कर सकते है.
शनि व ढ़ेेेया से परेशान
धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि देव, भैरव बाबा को अपना गुरु मानते हैं, इसलिए भैरव पूजा से शनि दोष शांत होता है. यदि आप शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान हैं, तो कालाष्टमी के दिन शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीपक जलाएं या भैरव मंदिर में दीप अर्पित करें. इस दिन काले तिल, उड़द, वस्त्र और जूते दान करना भी शुभ माना जाता है. साथ ही भैरव चालीसा या “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें और काले कुत्ते को रोटी खिलाएं. इससे कष्ट कम होते हैं.
भूल से भी ना करे यह काम
कालाष्टमी के पावन दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी माना गया है.इस दिन घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रखें, बेवजह के झगड़े और विवाद से दूर रहें. किसी भी इंसान या पशु-पक्षी को नुकसान न पहुंचाएं और मांसाहार, शराब व तामसिक भोजन से परहेज करें, केवल सात्विक आहार ग्रहण करें. किसी का अपमान न करें, खासकर बुजुर्गों का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें. साथ ही शास्त्रों के अनुसार इस दिन नुकीली या धारदार वस्तुओं का उपयोग करने से बचना चाहिए. इन नियमों का पालन करने से जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं.


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