Bhojshala Case: ‘मंदिर के हिस्सों का इस्तेमाल कर बनाई गई मस्जिद…’, ASI रिपोर्ट में बड़ा दावा, 16 मार्च को हाई कोर्ट में अगली सुनवाई
Dhar Bhojshala Case: धार भोजशाला मामले में आज इंदौर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान एएसआई सर्वे रिपोर्ट इंदौर खंडपीठ में पेश की गई और इसे कोर्ट ने पक्षकारों को सौंपी दी.
हाई कोर्ट ने बताया कि सभी पक्षकारों को रिपोर्ट मिल गई है. वहीं हाई कोर्ट ने सर्वे रिपोर्ट पर दोनों पक्षों को दो हफ्ते में दवों पर आपत्ति और साथ ही सुझाव देने के लिए समय दिया है. हाई कोर्ट ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर ले लिया है.
एएसआई सर्वे रिपोर्ट पर मामले से जुड़े मुख्य बिंदु
मंदिर का प्रमुख ढांचा
- एएसआई की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वर्तमान सरंचना एक पहले से माैजूद मंदिर के अवशेषों पर बनाई गई है. यहां मौजूद मंदिर 11वीं-12वीं शताब्दी का बताया गया है.
हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां
- एएसआई के सर्वे में बताया गया है कि सर्वे के दौरान परिसर से 97 ऐसी प्रमुख कलाकृतियां और मूर्तियां मिली है, जो हिंदू धर्म से संबंधित हैं. सर्वे में मिली मूर्तियों में भगवान गणेश, ब्रह्मा, शिव, हनुमान और श्री कृष्ण की खंडित मूतियां शामिल हैं.
संस्कृत के मिले शिलालेख
- सर्वे के दौरान दीवारों और खंभों पर बड़ी संख्या में संस्कृत और प्राकृत भाषा में लिखे शिलालेख मिले हैं. इनमें राजा भोज के समय की काव्य रचनाएं और व्याकरण के सूत्र शामिल हैं.
मराठा काल के अवशेष
- सर्वे रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि कुछ संरचनाओं और मूर्तियों पर मराठा काल का प्रभाव भी देखने को मिला है, जो इसके लगातार उपयोग को दर्शा रहा हैं.
इस्लामी सरंचनाओं का निर्माण
- एएसआई सर्वे रिपोर्ट में पाया गया है कि मस्जिद के निर्माण में मंदिर के स्तंभो और मंदिर के पत्थरों का उपयोग किया गया था. इसमे कई स्तंभों पर हिंदू प्रतीकों को मिटाने की कोशिश की गई है.
सरस्वती प्रतिमा का विशेष संदर्भ
- रिपोर्ट में बताया गया है कि सरस्तवी की प्रतिमा वाले स्थान की पहचान भी की गई है, जहां मूल रूप से वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा स्थापित की गई होगी. हालांकि इस समय वह प्रतिमा लंदन के संग्रहालय में रखी गई है.
वैज्ञनिक तकनीक (जीपीआर)
- ‘ग्राउंड पेनिट्रेटिंग राडार’ एएसआई के सर्वे में पता चला है कि जमीन के नीचे भी कई दिवारें और कमरों को दबाया हुआ है, जो प्रमुख रूप से मंदिर के आधार का हिस्सा हैं.
वास्तुकला और वास्तु शैली
- ,खंभो पर उकेरी गई घंटियां, कमल के फूल, और कीर्तिमुख कलाकृतियां (हिंदू वास्तुकलाक का एक प्रमुख प्रतीक) स्पष्ट रूप से मंदिर निर्माण शैली का और परमार कालीन समय की पूष्टि करते हैं.
नक्काशी के साथ हुई छेड़छाड़
- सर्वे रिपोर्ट में दर्ज किया गया है कि कई हिस्सों पर पुरानी नक्काशी को ढ़कने के लिए प्लास्टर का इस्तेमाल किया गया था. सर्वे के दौरान इसको हटाने पर नीचे हिंदू कलाकृतियां दिखाई दी है.
समय का निर्धारण
- सर्वे में पुरातात्विक विश्लेषण और कार्बन डेटिंग के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि यह स्थल राज भाेज (1000-1055 ई) के काल में एक भव्य और महान शिक्षा का केंद्र और मंदिर था.
हाई कोर्ट ने सर्वे रिपोर्ट देखने के बाद मामले पर अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गई है. कोर्ट में रिपोर्ट ओपन होने के बाद, अब हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों के लोग वैज्ञानिक तथ्यों के साथ उनके आधार पर अपनी दलीलें कोर्ट में पेश करेंगे.


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